Saturday 23 December 2017

क्या आप जानते हैं की भारतवर्ष का प्राचीन नाम “अजनाभवर्ष” था


(१)
वास्तविक अखंड  भारतवर्ष का इतिहास
क्या आप जानते हैं की भारतवर्ष का प्राचीन नाम “अजनाभवर्ष” था
प्रिय मित्रों किसी भी व्यक्ति या देश के  ज्योतिषीय विश्लेषण हेतु उसका जन्म कालीन विवरण नितांत आवश्यक है I  वैसे तो हमारे देश के ज्योतिर्विद  अंग्रेजों के चंगुल से भारतवर्ष की  आज़ादी के दिन १५ अगस्त १९४७ रात्रि १२.०० को ही भारत का वास्तविक जनम विवरण मानकर भविष्यकथन करते हैं जबकि १५ अगस्त १९४७ को भारत का चौबीसवां विभाजन हुआ था I
  इतिहासकारों ने भारत वर्ष को प्रमुखता से तीन भाग में विभाजित किया है  I
१-प्राचीन भारत                                                 २-मध्यकालीन भारत                   ३- आधुनिक भारत
१००० ई पू के पश्चात १६ महाजनपद उत्तर भारत में मिलते हैं। ५०० ईसवी पूर्व के बाद, कई स्वतंत्र राज्य बन गए। उत्तर में मौर्य वंश, जिसमें चन्द्रगुप्त मौर्य और अशोक सम्मिलित थे, ने भारत के सांस्कृतिक पटल पर उल्लेखनीय छाप छोड़ी १८० ईसवी के आरम्भ सेमध्य एशिया से कई आक्रमण हुए, जिनके परिणामस्वरूप उत्तरी भारतीय उपमहाद्वीप में इंडो-ग्रीकइंडो-स्किथिअनइंडो-पार्थियन और अंततः कुषाण राजवंश स्थापित हुए तीसरी शताब्दी के आगे का समय जब भारत पर गुप्त वंश का शासन था, भारत का "स्वर्णिम काल" कहलाया। दक्षिण भारत में भिन्न-भिन्न समयकाल में कई राजवंश चालुक्यचेरचोलकदम्बपल्लव तथा पांड्यचले विज्ञानकलासाहित्यगणितखगोल शास्त्रप्राचीन प्रौद्योगिकीधर्म, तथा दर्शन इन्हीं राजाओं के शासनकाल में फ़ले-फ़ूले |
मध्यकालीन भारत:-
12वीं शताब्दी के प्रारंभ में, भारत पर इस्लामी आक्रमणों के पश्चात, उत्तरी व केन्द्रीय भारत का अधिकांश भाग दिल्ली सल्तनत के शासनाधीन हो गया; और बाद में, अधिकांश उपमहाद्वीप मुगल वंश के अधीन। दक्षिण भारत में विजयनगर साम्राज्य शक्तिशाली निकला। हालांकि, विशेषतः तुलनात्मक रूप से, संरक्षित दक्षिण में, अनेक राज्य शेष रहे अथवा अस्तित्व में आये।
17वीं शताब्दी के मध्यकाल में पुर्तगालडचफ्रांसब्रिटेन सहित अनेकों युरोपीय देशों, जो कि भारत से व्यापार करने के इच्छुक थे, उन्होनें देश में स्थापित शासित प्रदेश, जो कि आपस में युद्ध करने में व्यस्त थे, का लाभ प्राप्त किया। अंग्रेज दुसरे देशों से व्यापार के इच्छुक लोगों को रोकने में सफल रहे और १८४० ई तक लगभग संपूर्ण देश पर शासन करने में सफल हुए। १८५७ ई में ब्रिटिश इस्ट इंडिया कम्पनी के विरुद्ध असफल विद्रोह, जो कि भारतीय स्वतन्त्रता के प्रथम संग्राम से जाना जाता है, के बाद भारत का अधिकांश भाग सीधे अंग्रेजी शासन के प्रशासनिक नियंत्रण में आ गया।



(२)

आधुनिक भारत:-

बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में अंग्रेजी शासन से स्वतंत्रता प्राप्ति के लिये संघर्ष चला। इस संघर्ष के परिणामस्वरूप 15 अगस्त1947  को सफल हुआ जब भारत ने अंग्रेजी शासन से स्वतंत्रता प्राप्त की, मगर देश को विभाजन कर दिया गया। तदुपरान्त 26 जनवरी1950  को भारत एक गणराज्य बना।

१८५७ से १९४७ तक अंगेजों ने  हिंदुस्तान के कई टुकड़े कर कुल ७ नए देश बना दिए थे I सन १९४७ में हिंदुस्तान का चौबीसवां विभाजन कर पाकिस्तान बनाया गया I
1857 में भारत का क्षेत्रफल 83 लाख वर्ग किमी था। वर्तमान भारत का क्षेत्रफल 33 लाख वर्ग किमी है।
 पड़ोसी 9 देशों का क्षेत्रफल 50 लाख वर्ग किमी बनता है।अखंड भारत की स्थिति कैसी थी
आज तक किसी भी इतिहास की पुस्तक में इस बात का उल्लेख नहीं मिलता की बीते 2500 सालों में हिंदुस्तान पर जो आक्रमण हुए उनमें किसी भी आक्रमणकारी ने अफगानिस्तान, म्यांमार, श्रीलंका, नेपाल, तिब्बत, भूटान, पाकिस्तान, मालद्वीप या बांग्लादेश पर आक्रमण किया हो। अब यहां एक प्रश्न खड़ा होता है कि यह देश कैसे गुलाम और आजाद हुए। पाकिस्तान व बांग्लादेश निर्माण का इतिहास तो सभी जानते हैं। बाकी देशों के इतिहास की चर्चा नहीं होती। हकीकत में अंखड भारत की सीमाएं विश्व के बहुत बड़े भू-भाग तक फैली हुई थींI

सन 1800 से पहले विश्व के देशों की सूची में वर्तमान भारत के चारों ओर जो आज अन्य देश माने जाते हैं उस समय ये देश थे ही नहीं। यहां राजाओं का शासन था। इन सभी राज्यों की भाषा अधिकांश शब्द संस्कृत के ही हैं। मान्यताएं व परंपराएं बाकी भारत जैसी ही हैं। खान-पान, भाषा-बोली, वेशभूषा, संगीत-नृत्य, पूजापाठ, पंथ के तरीके सब एकसे थे। जैसे-जैसे इनमें से कुछ राज्यों में भारत के इतर यानि विदेशी मजहब आए तब यहां की संस्कृति बदलने लगी।





(३)
ये थीं अखंड भारत की सीमाएं

इतिहास के पन्नों  में पिछले 2500 वर्ष में जो भी आक्रमण हुए (यूनानी, यवन, हूण, शक, कुषाण, सिरयन, पुर्तगाली, फेंच, डच, अरब, तुर्क, तातार, मुगल व अंग्रेज) इन सभी ने हिंदुस्तान पर आक्रमण किया ऐसा इतिहासकारों ने अपनी पुस्तकों में कहा है। किसी ने भी अफगानिस्तान, म्यांमार, श्रीलंका, नेपाल, तिब्बत, भूटान, पाकिस्तान, मालद्वीप या बांग्लादेश पर आक्रमण का उल्लेख नहीं किया है।
एशिया द्वीप( जम्बूद्वीप )से हिन्द महासागर (इन्दू सरोवरम् )तक के भाग को भारत वर्ष कहते थे :-
जब हम  पृथ्वी का जल और थल में वर्गीकरण करते हैं, तब सात द्वीप एवं सात महासमुद्र माने जाते हैं। हम इसमें से प्राचीन नाम जम्बूद्वीप जिसे आज एशिया द्वीप कहते हैं तथा इन्दू सरोवरम् जिसे आज हिन्दू महासागर कहते हैं, के निवासी हैं। इस जम्बूद्वीप (एशिया) के लगभग मध्य में हिमालय पर्वत स्थित है। हिमालय पर्वत में विश्व की सर्वाधिक ऊंची चोटी सागरमाथा, गौरीशंकर हैं, जिसे 1835 में अंग्रेज शासकों ने एवरेस्ट नाम देकर इसकी प्राचीनता व पहचान को बदल दिया।
अखंड भारत के इतिहास के पन्नों में हिंदुस्तान की सीमाओं का उत्तर में हिमालय व दक्षिण में हिंद महासागर का वर्णन है, परंतु पूर्व व पश्चिम का वर्णन नहीं है। जबकि  कैलाश मानसरोवरसे पूर्व की ओर जाएं तो वर्तमान का इंडोनेशिया और पश्चिम की ओर जाएं तो वर्तमान में ईरान देश या आर्यान प्रदेश हिमालय के अंतिम छोर पर हैं।
 
एटलस के अनुसार जब हम श्रीलंका या कन्याकुमारी से पूर्व व पश्चिम की ओर देखेंगे तो हिंद महासागर इंडोनेशिया व आर्यान (ईरान) तक ही है। इन मिलन बिंदुओं के बाद ही दोनों ओर महासागर का नाम बदलता है। इस प्रकार से हिमालय, हिंद महासागर, आर्यान (ईरान) व इंडोनेशिया के बीच का पूरे भू-भाग को आर्यावर्त अथवा भारतवर्ष या हिंदुस्तान कहा जाता है।
भारत का अब तक 24 विभाजन

सन 1947 में भारतवर्ष का पिछले ढाई हज़ार वर्षों में 24वां विभाजन है। अंग्रेज का 350 वर्ष पूर्व के लगभग ईस्ट इण्डिया कम्पनी के रूप में व्यापारी बनकर भारत आना, फिर धीरे-धीरे शासक बनना और उसके बाद 1857 से 1947 तक उनके द्वारा किया गया भारत का 7वां विभाजन है। 1857 में भारत का क्षेत्रफल 83 लाख वर्ग किमी था। वर्तमान भारत का क्षेत्रफल 33 लाख वर्ग किमी है। पड़ोसी 9 देशों का क्षेत्रफल 50 लाख वर्ग किमी बनता है।
आचार्य राजेश कुमार
मेल ई डी-RAJPRA.INFOCOM@GMAIL.COM




Monday 18 December 2017

2018 में कौन कौन राशियां होंगी माला माल :-

2018 में कौन कौन राशियां होंगी माला माल :-

किन राशी वालों का खुलने वाला है किस्मत का ताला !

प्रिय मित्रों ये तो सब जानते है कि बहुत ही जल्द 2017 खत्म होने वाला है और ऐसे में हर कोई नए साल का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहा है. वही अगर आपको ये पता चल जाए कि आने वाला साल आपके लिए खुशिया लेकर आने वाला है, तो जश्न का मजा दोगुना हो जाता है. जी हां आज हम आपको बताएंगे कि आने वाले साल में ऐसी कौन सी राशियां है, जिनकी किस्मत खुलने वाली है.


नए साल में ग्रहों की चाल भी बदलेगी और बदले हुए ग्रह कुछ राशियों के लोगों को मालामाल बना सकते हैं। आज हम आपको उन राशियों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन पर 2018 में खूब पैसा बरसने वाला है।

राशियाँ जिनको 2018 में खूब धन लाभ होगा

मेष राशि

मेष राशि के लोगों को इस साल अपनी क्रिएटिविटी की वजह से बहुत फायदा होने वाला है। शत्रु परास्‍त होंगें और धन का लाभ होगा लेकिन इस साल आपको अपनी सेहत का खास ख्‍याल रखना है।

वृषभ राशि

आपके लिए 2018 का साल ज्‍यादा अच्‍छा तो साबित नहीं होगा लेकिन आर्थिक रूप से आपको बहुत फायदा मिलने वाला है। संतान सुख की प्राप्‍ति भी हो सकती हैं। परेशानियां आएंगीं लेकिन आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी।

मिथुन राशि

मिथुन राशि के लोगों का मान-सम्‍मान बढ़ेगा और लोगों के बीच उनकी तारीफ होगी। इस साल रोज़गार के नए अवसर तलाश कर रहे हैं तो आपको इस काम में सफलता मिलेगी। आय के साधन बढ़ेंगें जिससे खूब पैसा आएगा।

कर्क राशि

कर्क रा‍शि के लोगों के उत्‍साह में इस साल वृद्धि होगी। काम में ज्‍यादा मन लगेगा जिससे खूब पैसा कमाने का मौका भी मिलेगा। व्‍यापार में भी मुनाफा होगा और सैलरी बढ़ने की भी उम्‍मीद है।






सिंह राशि

अगर सिंह राशि के लोग लंबे समय से किसी कोर्ट केस में फंसे थे तो 2018 में आपको उस केस में जीत हासिल हो सकती है। भाग्‍योन्‍नति के मार्ग प्रशस्‍त होंगें।

तुला

तुला राशि वाले जातकों के लिए 2018 बेहद शुभ साबित होने वाला है. हर बिगड़े हुए काम बनेंगे. 2018 में मंगल राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं, इस गोचर से सबको लाभ होगा. मगर तुला राशि को कुछ खास लाभ होगा I 2018 में तुला राशि के लोगों पर मां लक्ष्‍मी की कृपा रहेगी। रुका हुआ धन वापिस मिल सकता है। किसी को भी पैसे उधार ना दें।

मकर राशी

मकर राशि के लाभेश भी मंगल ही है. और इसी वजह से इस राशि के जातक भी लाभान्वित होंगे . इन राशि वालों के लिए उत्तम लाभ बनेगा. इन राशि के लोगों के लिए नए साल में मित्रों और विदेश यात्रा के योग हैं.

तुला और मकर राशी के लिए वर्ष 2018 में व्यापार के भी बहुत अच्छे योग हैं. अगर इन दोनों के जातक व्यापार की शुरुआत करना चाहे तो कदम पीछे न हटाएं क्योंकि सफलता के 100 फीसदी चांस है

धनु राशि

कहीं विदेश यात्रा पर जाने का योग बन रहा है। व्‍यवसाय और नौकरी में धन कमाने के नए अवसर प्राप्‍त होंगें।

मीन राशि

2018
में आपकी संपत्ति में इजाफा होगा। दुश्‍मनों से सावधानी बरतें वरना नुकसान हो सकता है। मेहनत से खूब पैसा कमाने में सफल होंगें।

ये है वो राशियाँ हैं जिनको 2018 में अपेक्षाकृत खूब धन लाभ होगा किन्तु जीवन के कुछ क्षेत्र में परेशानी का सामना भी करनापड़ सकता है I
आचार्य राजेश कुमार( दिव्यांश ज्योतिष केंद्र )                                                                                               Mail id :-rajpra.infocom@gmail.com



वर्ष 2018 में ये दो राशि वालों के घर में होगी खूब धन की बरसात

वर्ष 2018 में ये दो राशि वालों के घर में होगी खूब  धन की बरसात

इस बार 2018 कुछ खास है. क्योंकि किसी भी राशि के जातक के लिए आने वाला साल खराब नहीं है. नई उमंगों के साथ नया साल शुरु होगा.
हम आपको आज वो दो राशियां बताने वाले है जिनके लिए नया साल फायदेमंद होगा. तो ये हैं दो राशियां जो 2018 में मालामाल होंगी. ये राशियां बहुत ही भाग्यशाली होंगी, सफलता इनके कदम चूमेंगी
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तुला राशी

तुला राशि वाले जातकों के लिए 2018 बेहद शुभ साबित होने वाला है. हर बिगड़े हुए काम बनेंगे. 2018 में मंगल राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं, इस गोचर से सबको लाभ होगा. मगर तुला राशि को कुछ खास लाभ होगा i तुला राशि की धन में वृद्धि होगी.

मकर राशी

दूसरी सौभाग्यशाली राशि है मकर राशि..इस राशि के लाभेश भी मंगल ही है. और इसी वजह से इस राशि के जातक भी स्व राशि होकर काम करेंगे. इन राशि वालों के लिए उत्तम लाभ बनेगा. इन राशि के लोगों के लिए नए साल में मित्रों और विदेश यात्रा के योग हैं.

    इन दोनों के लिए अगले साल यानि 2018 व्यापार के भी बहुत अच्छे योग हैं. अगर इन दोनों के जातक व्यापार की शुरुआत करना चाहे तो कदम पीछे न हटाएं क्योंकि सफलता के 100 फीसदी चांस है.

आचार्य राजेश कुमार( दिव्यांश ज्योतिष केंद्र )                                                                                               Mail id :-rajpra.infocom@gmail.com


Saturday 16 December 2017

दिव्यांश ज्योतिष केंद्र को "Top Three Rated of 2017 Award" प्राप्त हुआ जिसका प्रशस्तिपत्र आपके समस्त प्रेषित

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